भजन/भावगीत

जय हो बरसाने वाली

हरि ने लिया द्वापर में अवतार धरा पर, यशोदा लाल कहाएँ,
लक्ष्मी जी भी राधा रूप में आई, वृषभान दुलारी सब बुलाएँ।
अभिरूपा है राधा रानी, जय हो प्यारी बरसाने वाली,
घट – घट में बसने वाली, किशोरी भक्तों की करती रखवाली ।

राधा नाम श्रद्धा भाव से जो सुमिरे, जीवन “आनंद” पाएँ,
हर बाधा हरे राधिका, हरि स्वयं अंत समय दर्शन देने आएँ।
सारे जन्मों के कटे पाप पल में, प्राणी मोक्ष पाएँ,
अनंत वैभव देती राधा रानी, हर इच्छा पूरी हो जाएँ।

वृंदावन की गलियों में राधा – राधा हर मन गाएँ,
डाल -डाल हर पात – पात में राधा राधा स्वर ही सुनाएँ,
कान्हा के हृदय बसती एक धुन है राधा – राधा नाम,
दर्शन दे दो राधा-श्याम, पूरण कीजो मेरो सब काम ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु