सच्चा शिष्य जीवनभर गुरु की सीख को आत्मसात करता है।
गुरु जीवन के उस महान ज्योति स्तंभ हैं, जो अज्ञान के अंधकार से हमें उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाते हैं, भारतीय संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु, महेश के समान पूजनीय माना गया है, गुरु हर दिन, हर समय हमारे भीतर नया ज्ञान, संस्कार और अनुशासन अंकुरित करते हैं, माता-पिता के बाद गुरु ही हैं जो मानवता का सच्चा अर्थ और जीवन जीने की राह सिखाते हैं, वे केवल विषय ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि कठिनाइयों में सही दिशा, बुराइयों से बचाव और आत्मविश्वास का संचार करते हैं, गुरु का सानिध्य जीवन को निखारता है, हर क्षेत्र में गुरु की विशेष भूमिका है,नृत्य, कला, संगीत, विज्ञान, जीवन के हर मोड़ पर शिष्य को आपको पारंगत करने वाला गुरु ही है, शिक्षा चाहे किसी भी विषय की हो, बिना गुरु के उसका सार जानना असंभव है, महापुरुषों ने भी गुरु को भगवान से ऊंचा स्थान दिया, गुरु के आशीर्वाद और मार्गदर्शन के बिना कोई भी लक्ष्य, कोई भी सफलता अधूरी है, गुरु का आदर एक दिन या पर्व तक सीमित नहीं,गुरु पूर्णिमा हो या शिक्षक दिवस, यह केवल स्मरण करवाने वाले दिन हैं, असली सम्मान और श्रद्धा तो प्रतिदिन है, सच्चा शिष्य जीवनभर गुरु की सीख को आत्मसात करता है और उनके प्रति श्रद्धा रखता है, गुरु का महत्व हमेशा, हर दिन, हर समय बना रहता है, क्योंकि वही हमारी पीढ़ी, समाज और भविष्य का निर्माण करते हैं।
— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह
