विज्ञान

चन्द्र ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है

चन्द्र ग्रहण एक प्राकृतिक , खगोलीय घटना है,जो तब घटित होती है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा ऐसी स्थिति में होते हैं कि पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। यह घटना हमें न केवल ब्रह्मांड की गतिशीलता को समझने का अवसर प्रदान करती है, बल्कि हमारे वैज्ञानिक ज्ञान को भी समृद्ध करती है। आज के आधुनिक विज्ञान के दृष्टिकोण से, चंद्र ग्रहण को समझना और उसका निरीक्षण करना सुरक्षित और ज्ञानवर्धक अनुभव है।वैज्ञानिक दृष्टि से, चंद्र ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं, पूर्ण, आंशिक और पेनुम्ब्रल पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में डूब जाता है, जिससे उसे लाल रंग की आभा प्राप्त होती है, जिसे ब्लड मून भी कहा जाता है। यह रंग पृथ्वी के वायुमंडल में सूर्य की रोशनी के छटपटाने के कारण चंद्रमा पर पड़ता है। आंशिक ग्रहण में केवल चंद्रमा का कुछ भाग छाया में आता है, जबकि। पेनुम्ब्रल ग्रहण में छाया का प्रभाव बहुत हल्का होता है, जिससे अंतर आसानी से पहचानना मुश्किल होता है।आज के परिपेक्ष्य में, चंद्र ग्रहण न केवल खगोलीय वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आम जनता के लिए भी एक आकर्षक खगोल विज्ञान का अवसर है। विज्ञान ने ग्रहण की भविष्यवाणी और उसकी अवधि की गणना इतनी सटीक कर ली है कि इसे पहले से बताया जा सकता है, और लोग इसे डिजिटल माध्यमों से लाइव देख भी सकते हैं। चंद्र ग्रहण की घटना विश्व भर में हजारों वर्ष से देखी जा रही है और इसे अनेक संस्कृतियों में धार्मिक तथा सांस्कृतिक प्रतीक माना गया है। परंतु आधुनिक विज्ञान के अनुसार, इसमें कोई भी अलौकिक या भयभीत करने वाली बात नहीं होती। यह एक  नियमबद्ध घटना है जो हमारे ब्रह्मांड की दी गई संरचना का हिस्सा है। आज के डिजिटल युग में, चंद्र ग्रहण हमें यह सिखाने का एक मौका है कि प्रकृति के रहस्यों को समझने के लिए वैज्ञानिक सोच कितनी महत्वपूर्ण है।

यह हमें ब्रह्मांड की प्रणाली में मानव की जगह और समय के प्रवाह की समझ को भी गहरा करता है। आधुनिक विज्ञान और तकनीक के सहारे, हम इस प्राचीन प्राकृतिक घटना को बेहतर समझ सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसका ज्ञान संजो सकते हैं।

— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।