लघुकथा

आस्था लौट आई

“मम्मा देखो-देखो, मैं क्या लाया हूँ.” स्कूल से आए सोनू ने बड़ी उमंग से अपने हाथ में मिट्टी के छोटे-से गणेश जी को दिखाते हुए कहा.
“ये कहाँ से उठा लाया है?” संध्या के स्वर में थोड़ी झल्लाहट-सी थी!
“उठा कर नहीं आया हूँ मम्मा, बना कर लाया हूँ. इस बार हम दस दिन के श्री गणेशोत्सव पर इन्हीं गणपति जी को स्थापित करेंगे.”
“मिट्टी के गणेश और वो भी इतने छोटे-से?”
“हमारी मैम ने बताया है कि भगवान की मूर्ति छोटी हो या बड़ी, मिट्टी की हो या सोने की, बस श्रद्धा होनी चाहिए. आज मैम ने ही हमें गणेश जी की मूर्ति बनाना सिखाया था.”
“जब विसर्जन करने जाएंगे तो सबके सामने इतने छोटे-से गणेश जी को विसर्जित करना अच्छा लगेगा क्या?” न जाने किन ख्यालों में पूरी आस्थावान संध्या प्रश्न-पर-प्रश्न किए जा रही थी!
“हम विसर्जित करने कहीं जाएंगे ही क्यों? अपने बड़े-से पानी के टब में ही गाते-बजाते उनको विसर्जित करेंगे, फिर उसी पानी को फूलों की क्यारी में डाल देंगे, गणेश जी कहीं जाएंगे ही नहीं और हमारे कारण नदी में गंदगी भी नहीं होगी, जल्दी से हल्दी-केसर-कुमकुम दीजिए, मैं इन पर कलर कर दूंगा.” सोनू का उत्साह दर्शनीय था.
पर इस बार तो हम गणपति बिठाएंगे ही नहीं, पता है न कि कई दिन से मैं 2 मई के नवभारत टाइम्स का पेज नं. 18 ढूंढ रही हूँ, मिल ही नहीं रहा. हमारे यहाँ जो चोरी हुई है, उसके लिए उसका मिलना बहुत जरूरी है. मैं बड़ी परेशान हूँ.”
“मिल जाएगा मम्मा, गणपति बप्पा हैं न! आप रंग लाइए, मैं गणपति जी को रखने के लिए अखबार ला रहा हूँ.”
अनमनी-सी संध्या हल्दी-केसर-कुमकुम निकाल ही रही थी कि सोनू ने हाथ में अखबार का पन्ना दिखाते हुए कहा-
“लीजिए 2 मई के नवभारत टाइम्स का पेज नं. 18, मेरी किताबों के रैक में पड़ा था.”
“अरे, यह तो चमत्कार हो गया!” संध्या ने बेटे को तो चूमते हुए प्यार किया ही, मिट्टी के छोटे-से गणेश जी को हाथ में उठाकर सीने से लगाते हुए आस्था से “मेरे गणपति बप्पा मोरया” कहती हुई खुद उनको रंगने बैठ गई. उसकी आस्था लौट आई थी!

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244