कविता

ऊँचे पेड़ों तले

वह नित सुबह शाम आती है
झाड़ू पौछा चौका की सफाई कर निकल जाती है
जाते समय अपनी साड़ी के पल्लू से हाथ पौंछते हुए
उसके चेहरे पर एक तृप्ति होती है
चलो एक घर तो निपटा
आगे उसे चार घरों की सफाई भी करनी है
उस समय वह एक योद्धा की तरह दिखती है
उसे जिस घर में जो मिला उसे जीत समझ
अपने साथ लाये थैले में सहेज रखे जाती है
वह दूर नेपाल से रोजी रोटी के लिये
अपने बालकों के उज्ज्वल भविष्य के लिये
दिल्ली शहर आई है
जैसे ऊँचे ऊँचे पेड़ों के तले
छोटी छोटी घांसे व अमरवेल उग आती हैं
वैसे ही वे बेचारी व चतुर नजर आती हैं
उसे अपने सात बच्चों का पालन पोषण करने के लिये
प्रात: एक यौद्धा बन जाना पड़ता है
शाम ढलने के साथ वह मातृत्व में बदलती जाती है
क्योंकि एक रात ही तो होती है
जब वह अपने बच्चों की जरूरतों को
जानते हुए उनसे खुलकर बतिया पाती है
कुछ वर्षों की मेहनत उपरांत उसके बच्चे
सामान्य वर्ग को हराकर कोटा पाकर
दिल्ली शहर के मजबूत पेड़ बन जाते हैं!

— संगीता कुमारी

संगीता कुमारी

पिता का नाम---------------श्री अरुण कुमार माथुर माता का नाम--------------श्रीमती मनोरमा माथुर जन्मतिथी------------------- २३ दिसम्बर शिक्षा सम्बंधी योग्यता-----दसवीं (सी.बी.एस.ई) दिल्ली बारहवीं (सी.बी.एस.ई) दिल्ली बी.ए, दिल्ली विश्वविद्धालय एम.ए (अंग्रेजी), आगरा विश्वविद्धालय बी.एड, आगरा विश्वविद्धालय एम.ए (शिक्षा) चौधरी चरणसिंह विश्वविद्धालय रुचि--------------------------पढना, लिखना, खाना बनाना, संगीत सुनना व नृत्य भाषा ज्ञान-------------------हिंदी, अंग्रेजी काव्य संग्रह--- ह्रदय के झरोखे (यश पब्लिकेशन दिल्ली, शाहादरा) कहानी संग्रह--- अंतराल (हिंदी साहित्य निकेतन, बिजनौर उत्तर प्रदेश) काव्य संग्रह संगीता की कवितायें (विंध्य न्यूज नेट्वर्क) पता--- सी-72/4 नरोरा एटॉमिक पावर स्टेशन, टाउन शिप, नरोरा, बुलंदशहर उत्तर प्रदेश, पिन—203389 मोबाईल नम्बर—08954590566 E.mail: sangeeta2716@gmail.com sangeeta.kumari.5095@facebook.com www.sangeetasunshine.webs.com