कविता

सर्द की धूप

सर्द की सुबह हल्की धूप
गुलाबी गालों सी दिखती है
शर्माया हुआ सूरज देर तक सोता है
शाम जल्दी ढल जाने पर भी
ना जाने क्यों ऐसा करता है
ओस की बूँदे घास के कपोलों पर
यूँ सजी होती हैं
जैसे नर्म गालों पर स्नान उपरांत
जल की बूँदे बिखरी रहती हैं
दिन ढलने के साथ हल्की गर्माहट
सूखे तौलिये की भांति
कपौल से ओस की बूँदे पौंछ देती है
प्रकृति में तरोताजगी की महक
बहकी बहकी हवाओं में घुलती है
लोगों को कमरों से बाहर धूप में
निकलने के लिये विवश कर देती है
सभी स्पर्श करना चाहते हैं
सर्द की गुलाबी हल्की धूप को!

— संगीता कुमारी

संगीता कुमारी

पिता का नाम---------------श्री अरुण कुमार माथुर माता का नाम--------------श्रीमती मनोरमा माथुर जन्मतिथी------------------- २३ दिसम्बर शिक्षा सम्बंधी योग्यता-----दसवीं (सी.बी.एस.ई) दिल्ली बारहवीं (सी.बी.एस.ई) दिल्ली बी.ए, दिल्ली विश्वविद्धालय एम.ए (अंग्रेजी), आगरा विश्वविद्धालय बी.एड, आगरा विश्वविद्धालय एम.ए (शिक्षा) चौधरी चरणसिंह विश्वविद्धालय रुचि--------------------------पढना, लिखना, खाना बनाना, संगीत सुनना व नृत्य भाषा ज्ञान-------------------हिंदी, अंग्रेजी काव्य संग्रह--- ह्रदय के झरोखे (यश पब्लिकेशन दिल्ली, शाहादरा) कहानी संग्रह--- अंतराल (हिंदी साहित्य निकेतन, बिजनौर उत्तर प्रदेश) काव्य संग्रह संगीता की कवितायें (विंध्य न्यूज नेट्वर्क) पता--- सी-72/4 नरोरा एटॉमिक पावर स्टेशन, टाउन शिप, नरोरा, बुलंदशहर उत्तर प्रदेश, पिन—203389 मोबाईल नम्बर—08954590566 E.mail: sangeeta2716@gmail.com sangeeta.kumari.5095@facebook.com www.sangeetasunshine.webs.com