पर्यावरण

शरद ऋतु, सौंदर्य और समृद्धि का मौसम

शरद ऋतु वर्षा के बाद सितंबर से नवंबर तक विस्तृत होती है। यह ऋतु न तो अधिक गर्मी का बोझ ढोती है और न ही सर्दियों की कठोरता का। प्रकृति इस समय अपने सबसे मधुर और सौम्य रूप में दिखाई देती है। नीला आकाश, चारों ओर छाई हरियाली और हवा का मंद झोंका,सब मिलकर जीवन को ताजगी और नव ऊर्जा से भर देते हैं। जब वर्षा ऋतु विदा लेती है, तब शरद ऋतु की कोमल छाया धरती पर उतरती है। पेड़ों के पत्ते सुनहरे और लाल रंगों में रंग जाते हैं, मानो प्रकृति ने स्वयं को नया श्रृंगार दिया हो। खेतों में नई बुआई के बाद हरियाली की कालीन बिछ जाती है।  नदियां और तालाब भी इस समय साफ और उजले दिखते हैं। शरद पूर्णिमा की रात में जब चांद अपनी पूरी कलाओं के साथ खिलता है, तब उसकी  चांदनी धरती को  चांदी की आभा से ढक देती है, जो लोककथाओं और कविताओं में बार-बार गाई जाती है। यह ऋतु किसानों के लिए विशेष महत्व रखती है। वर्षा के बाद की उर्वरक मिट्टी में किसान नई फसलों की बुआई करते हैं। धान, गन्ना, और सरसों जैसी फसलें इसी समय आशा और परिश्रम के साथ खेतों में जीवन लेने लगती हैं। गांव,घर खेतों की हरियाली से आच्छादित हो जाते हैं और किसान परिवार समृद्धि की आशा में उल्लसित रहते हैं। शरद ऋतु को उत्सवों की ऋतु भी कहा जाता है। इस समय देशभर में दुर्गा पूजा, दशहरा और शारदीय नवरात्रि जैसे त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। किसान और शहरी समाज दोनों में यही वह समय है जब परिवार और समुदाय साथ आते हैं, पूजा, व्रत, मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जीवन में उल्लास भरते हैं। भारत की विविध परंपराओं का असली दर्शन इसी ऋतु की हल्की ठंडक और उजली धूप में होता है। शरद ऋतु को स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना गया है। हवा में नमी कम होती है, जिससे रोगाणुओं की वृद्धि घटती है और वातावरण स्वच्छ महसूस होता है। शरीर और मन दोनों को विश्राम और ऊर्जा प्राप्त होती है। आयुर्वेद में शरद ऋतु का विशेष वर्णन है,इस समय उपवास और सात्त्विक आहार को आवश्यक बताया गया है ताकि शरीर नई चेतना पा सके। शरद ऋतु पक्षी प्रेमियों के लिए भी खास होती है। इस मौसम में अनेक प्रवासी पक्षी सुदूर देशों से भारत की ओर प्रस्थान करते हैं। नदियों, झीलों और तालाबों के किनारे पक्षियों की चहचहाहट और कलरव  गूंजता है। यह दृश्य न सिर्फ प्रकृति प्रेमियों बल्कि आम जनमानस को भी हर्ष और प्रेरणा से भर देता है। भारतीय काव्य और साहित्य में शरद ऋतु की महिमा बार-बार चित्रित की गई है। कवियों ने इसकी  चांदनी शांति और सौंदर्य को मानवीय जीवन की पवित्रता और प्रेम से जोड़ा है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर से लेकर हिंदी के आधुनिक कवियों तक, सबने शरद पूर्णिमा की  चांदनी और शरदीय आभा को अपनी रचनाओं से अमर कर दिया है। कलाकारों और चित्रकारों के लिए भी यह ऋतु प्रेरणा का स्रोत बनी है। शरद ऋतु केवल एक मौसम नहीं, बल्कि जीवन का प्रतीक है। यह हमें संतुलन बनाए रखने, सौंदर्य का आदर करने और परिश्रम से समृद्धि अर्जित करने की शिक्षा देती है। प्रकृति के इस उत्सव में व्यक्ति को यह संदेश भी मिलता है कि हर संघर्ष और घनघोर वर्षा के बाद शांति और प्रकाश का समय आता है।

— डॉ. मुश्ताक अहमद

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।