ग़ज़ल
शुक्रिया बताया मिटाने से पहले
नचाया बहुत पर बचाने से पहले।
मदद माँगता कोई मुसीबत का मारा
बढ़ाओ कभी हाथ बुलाने से पहले।
किनारे किया और गुमनाम समझा
किसी ने न सोचा भुलाने से पहले।
तरीका सलीका तो पहले समझ ले
लगा आग थोड़ी जलाने से पहले।
हुआ मन बताये हुनर खूब ये भी
कभी रूठ जाओ मनाने से पहले।
— दिनेश दवे देव
