लघुकथा

लघु कथा – असली चोर

एक चोर चोरी का सामान लेकर भाग रहा था, रात का समय था पर एक सज्जन पुरुष ने जो सड़क पर सैर कर रहे थे उसे देख लिया और चोर चोर चिल्लाते हुए उसके पीछे भागे।
वह सज्जन अच्छे धावक थे इसलिए उन्होंने शीघ्र ही चोर को भागकर पकड़ लिया। शोर सुनकर आसपास से भी कई लोग वहां पर जमा हो गए। पर चोर बहुत शातिर था उसने चोरी का सामान नीचे फेंक दिया और सज्जन पुरुष के ऊपर ही खुद जोर-जोर से चोर चोर चिल्लाने लगा, और जमा हुई जनता के सामने जोर-जोर से बोलने लगा- यह चोर है, यह चोरी करके भाग रहा था ,मैंने इसे पकड़ लिया।
सज्जन पुरुष ने बहुत समझाया कि चोर मैं नहीं यह चोर है चोरी करके भाग रहा था मैंने ही इसे पकड़ा है ,पर कोई उसकी बात सुनने को राजी नहीं हुआ।
इस भीड़ में एक योगी पुरुष भी थे उन्होंने पूरा मामला समझकर कहा, मुझ पर भगवान की कृपा है, मैं इंसान के अंतरात्मा की आवाज सुन सकता हूं , मैं यह बता सकता हूं कि इनमें से असली चोर कौन है ,पर मुझे एक रात का समय दीजिए और सुबह मैं असली चोर को आपके हवाले कर दूंगा।
जमा हुई भीड़ उन दोनों को पdड़कर योगी जी के आश्रम तक ले आई योगी जी उन दोनों को लेकर अपने कमरे में चले गए और उन दोनों से कहा कि नीचे तहखाना है , उसमें एक पत्थर की मूर्ति है , आप दोनों वहीं पर रात बिताओगे और सुबह मुझसे मिलोगे। आप दोनों अब रसोई घर में जो वहां खाना तैयार है, खाना खाकर दोनों वापस तहखाने में आ जाना और रात यहीं बितानी है, मैं सुबह आकर मिलूंगा।
असली चोर मन ही मन बहुत खुश हो रहा था उसे लग रहा था कि योगी जी को इसी पुरुष पर शक है और सामान भी इसी के पास से बरामद हुआ है। इसी घमंड में वह दूसरे सज्जन से बोला, ‘देखो मैंने तुम्हें कैसा फसाया, अब मैं साफ बचकर निकल जाऊंगा और सुबह यह बाबा जी आपको इस जनता के हवाले कर देंगे, फिर आपको पता चलेगा कि किसी शातिर से पंगा लेने पर क्या होता है।’
सज्जन पुरुष रात भर आंसू बहाता रहा और एक कोने में बैठा रहा। सुबह होने पर वह दोनों जोगी बाबा के आने का इंतजार करने लगे। तभी एक चमत्कार हुआ, वह पत्थर की मूर्ति हिली, और सामने आकर खड़ी हो गई।
मूर्ति ने कहा- “मैंने आप दोनों की बातें सुन ली है और मुझे असली चोर का पता लग गया है। जब आप खाना खाने के लिए गए थे तो पीछे से मैं ही मूर्ति रूप में आकर बैठ गया था तहखाने में अंधेरा था इसलिए किसी को इस पर शक भी नहीं हुआ।”
अब तो असली चोर ने बाबा जी के पैर पकड़ लिए और उनसे माफी मांगने लगा लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, रात वाली सारी जनता इस चमत्कार को देखने के लिए वहां इकट्ठा हो चुकी थी और बाबा जी ने असली चोर को भीड़ के हवाले कर दिया। चाहे कोई कितनी भी कोशिश कर ले पर बुरे काम का बुरा नतीजा।

— जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया जन्म दिन --१४/२/१९४९, टेक्सटाइल इंजीनियर , प्राइवेट कम्पनी में जनरल मेनेजर मो. 9855022670, 9855047845