विद्यार्थी परिषद की जीत – राष्ट्रवादी विचारधारा की जीत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आनुषंगिक संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दिल्ली विश्वविद्यालय, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय तथा पंजाब व पटना विश्वविद्यालय के अभी हाल ही में संपन्न हुए छात्र संघ के चुनावों में रिकॉर्ड जीत हासिल करते हुए विजय का परचम लहराया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की यह जीत बताती है देश में युवाओं का मूड कैसा है। जो लोग नेपाल और बांग्लादेश की तरह भारत में तख्ता पलट का दिवा स्वप्न देखते थे वह अब सब बेनकाब हो चुके हैं।
नेपाल में अभी जिस प्रकार की राजनैतिक उथल पुथल हुई उसके बाद कुछ विपक्षी नेता और उनके समर्थक भारत के gen-z यानी युवाओं के दिल में नेपाल जैसी क्रांति भड़कने की उम्मीद कर रहे थे। पर छात्रसंघ चुनावों में जो परिणामी आए हैं, वह NSUI और वाम दलों के छात्र संगठनों का दिल तोड़ने वाले हैं। भारत की नई पीढ़ी जो आधुनिक संचार साधन और तकनीकी की दुनियां से भलीभांति परिचित हैं ईस्वी सन् दो हजार के बाद जन्मे लोग आज वर्तमान भारत में प्रगति का एक नया अध्याय रच रहे हैं यह पीढ़ी ऊर्जा से भरी हुई है जो सकारात्मक, प्रगतिशील एवं विकास के सभी पहलुओं पर अपनी उपस्थित सुनिश्चित कर रही हैं। भारत के यह युवा नए भारत का नया कीर्तिमान स्थापित करने वाले हैं यह राष्ट्रवाद से भरे हुए हैं इन्हें अराजक तत्व अब बहका नहीं सकते हैं। भारत के तथाकथित सेक्युलरिज्म का छद्म आवरण से ढके लोग अब नंगे हो रहे हैं जो यह चाहते थे कि भारत में जातीय वैमनस्य फैलाकर, पंथ मजहब के आंड में विष वमन कर देश में अराजकता पैदा करेंगे वह उनके लिए अब कोसों दूर है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अपने स्थापना काल से लेकर आज तक देशभक्ति से ओतप्रोत पीढी का सृजन कर रही है उसी का आज परिणाम है कि ज्ञान शील एकता परिषद की विशेषता का नारा फलीभूत हो रहा है। राजनीतिक चश्मे से यदि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की इस जीत की बात करें तो यह अभी भी स्पष्ट है कि पूरा इंडी गठबंधन बुरी तरह से ध्वस्त होता दिख रहा है अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की विचारधारा और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा मिलती जुलती है इससे यह साबित होता है कि युवाओं की पसंद आज भी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ही हैं पिछले लगभग दो माह से पूरा इंडी गठबंधन वोट चोरी, महंगाई, बेरोजगारी पर सरकार को घेर रहा था जिसके लिए समूचे विपक्ष ने भारत में घूम घूम कर सरकार के खिलाफ जहर उगला है उसका नतीजा शून्य निकला। जिन युवाओं के दम पर कुछ लोग नेपाल और बांग्लादेश जैसी क्रांति भारत में कराना चाह रहे थे वह अब मुंह छिपा कर दब गए हैं। यह छात्र संगठन केवल छात्र राजनीति ही नहीं करता अपितु समाज जीवन के अनेकों क्षेत्रों में सेवा कार्य भी करता है। अपने स्थापना काल से हीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने छात्र हित और राष्ट्र हित से जुड़े प्रश्नों को प्रमुखता से उठाया है और देश व्यापी आंदोलनों का नेतृत्व किया है। आज इस संगठन से जुड़े रहे लोग समाज-जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। बांग्लादेशी अवैध घुसपैठ और कश्मीर से धारा ३७० को हटाने के लिए विद्यार्थी परिषद समय-समय पर आदोलन चलाते रहा है। बांग्ला देश को तीन बीघा भूमि देने के विरुद्ध परिषद ने ऐतिहासिक सत्याग्रह किया था। विद्यार्थी परिषद् देशभर के अनेक राज्यों में प्रकल्प चलाती है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नाम सबसे ज्यादा रक्तदान करने का रिकॉर्ड है। इसके अतिरिक्त निर्धन मेधावी छात्र, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिय़े निजी कोचिंग संस्थानों में नहीं जा सकते उनके लिये स्वामी विवेकानंद नि:शुल्क शिक्षा शिविर का आयोजन किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की ओर से हरेक साल Student exchange for inter-state living का आयोजन किया जाता है जिसके अंतर्गत दूसरे राज्य में रहने वाले छात्र अन्य राज्यों में प्रवास करते हैं और वहां की संस्कृति और रहन-सहन से परिचित होते हैं। विद्यार्थी परिषद शिक्षा के क्षेत्र में उच्च मापदंडों को अपनाकर कार्य करता है। जिसका परिणाम आज हम सभी को दिखाई पढ़ रहा है, यह छात्र संगठन दुनिया का सबसे बड़ा छात्र सदस्यता वाला संगठन है। हम युवाओं से आग्रह करते हैं कि विद्यार्थी परिषद के साथ जुड़कर देश की प्रगति में साथ बढ़ें।
— बाल भास्कर मिश्र
