जय मां जगदम्बे
सूरज की पहली किरण
मंद प्रकाश बिखेरे
धरती मुस्काए
फूलों की कोमल खुशबू
हवा में घुलती जाए
मन को सुकून दे
नदी की कल-कल धारा
पत्थरों से टकराकर
जीवन का गीत सुनाए
हवाओं का कोमल झोंका
पेड़ों की शाखों में
सुरों का जाल बुनता है
चिड़ियों की मधुर चहचहाहट
भोर की शांति में
आनंद घोलती है
बरसात की बूँदें
धरा को प्रेम से भरें
हरियाली नाच उठे
चाँद की चाँदनी
रात को नर्म कर दे
सपनों को सजाए
पर्वत की विशालता
मन को विस्तार दे
शांति का संदेश लाए
मां जगदम्बे की आरती
दिल को प्रेम से भरे
आशा की ज्योति जगाए
सफलता, स्वास्थ्य और प्रेम
सद्भाव और खुशियाँ
सदा बनी रहें
— डॉ. अशोक
