मुस्कुराने का सलीका
सूरज की किरणें
चेहरे पर जब उतरें
खुशियों का रंग
फूलों की महक
हवा संग मिलती है
सुखद एहसास
बूँदों की नृत्य
झरनों की मधुर गूँज
मन को भाये
पलकों पर ठहर
चाँदनी की कोमलता
सपनों में बसे
हवा के झोंके
पत्तों को हिलाते हैं
हृदय मुस्काए
सादगी के संग
मन में शांति बस जाए
दुनिया हंस पड़े
सूरज ढलते ही
सांझ की नरमी लाए
मन रम जाए
बच्चों की हँसी
खुशियों का संगीत हो
राह में उजाला
किताबों के पन्ने
ज्ञान की खुशबू भरें
चेहरा खिल उठे
दोस्तों की बातें
स्नेहिल संवाद करें
मन प्रफुल्लित
संगीत की लहर
साँसों में समा जाए
हृदय नाचे
सपनों की छाँव
रात को सजीव कर दे
चाँद मुस्काए
सुकून की चादर
हवा में फैली रहे
मन खिल उठे
रात के तारों
आसमान में झिलमिल
हृदय में चमक
फूलों की घाटी
संगीत की गूँज में
सपनों में रंग
मन की उदासी
सूरज की किरणें छूए
हृदय मुस्काए
आशा की किरण
अँधेरों को हर ले
जीवन खिल उठे
मुस्कुराने का सलीका
हर दिन सीखो इसे
खुशियों की राह
पल-पल संजोओ
स्नेह और उमंग को
मन प्रफुल्लित
हवा में मधुरता
सूरज और चाँद संग
जीवन खिल उठे
स्नेह और शांति
हर दिल में बसे रहे
विश्व मुस्काए
— डॉ. अशोक
