कविता

कोजागिरी पूर्णिमा

योगेश्वर जगद्गुरु श्री कृष्ण ने गोपियों की सुनी पुकार,
श्री परमेश्वर आए भवसागर से करने जीवों का उद्धार,
पुलकित हुआ धरती का ऑंगन कण-कण हुआ वृंदावन,
जगत के नाथ खेले महारास मदन मनमोहन मनभावन ।

महारास की रात ये बरसे अद्भुत अनुपम अमृत की धार,
सज धज आई देखो शीतल चॉंदनी करके सोलह श्रृंगार,
शरद पूनम के चॉंद का हर्षोल्लास हुआ वृहद अभिनंदन,
धवल अमृत रश्मियॉं शरद पूनम की देती है पुनर्जीवन ।

छिटका अमृतानंद दसो दिशाओं में खुशियों की फुहार,
चकोर ने किया शुक्रिया चॉंद का खोकर प्रेम में बार-बार,
शरद ऋतु का हुआ शुभागमन मौसम में हुआ परिवर्तन,
धरा ने ओढ़ी चुनरी चमकीली बरसी नभ से बूंदें पावन ।

हुई पुष्पित पल्लवित प्रकृति सुखदाई वातावरण पाकर,
रातरानी ने खोली पंखुड़ियॉं “आनंद” प्रकृति में भरकर,
मॉं महालक्ष्मी की हुई कृपा सब पर कटे दुःखों के बंधन,
रोग, शोक सारा मिटा सुवासित सुखमय हुआ तन-मन ।

कोजागिरी पूर्णिमा सुख समृद्धि वैभव लाऍं सबके द्वार,
बांके बिहारी जी की हम सब पर हो विशेष कृपा अपार,
भक्त जन श्रद्धा से खीर का भोग लगा करते हैं जागरण,
नवयौवन धन-धान्य वैभव बढ़ें दूर हो दुखों का आवरण ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु