भाषा-साहित्य

साहित्य की कसौटी पर प्रेमचंद : साहित्य के उद्देश्य एवं सामाजिक प्रतिबद्धता

“मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि प्रतिवर्ष 8 अक्टूबर को मनाई जाती है। इस दिन उनके साहित्यिक योगदान और सामाजिक विचारों को सम्मानित करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। मुंशी प्रेमचंद को हिंदी साहित्य में “उपन्यास सम्राट” के रूप में भी जाना जाता है और उनकी कहानियां व उपन्यास आज भी प्रासंगिक और अमूल्य हैं।

हिंदी साहित्य के इतिहास में मुंशी प्रेमचंद्र एक ऐसी प्रखर प्रतिभा हैं, जिनके साहित्यिक योगदान ने भारतीय जीवन के प्रत्येक पक्ष को स्पर्श किया। 31 जुलाई 1880 को वाराणसी जिले के लमही गाँव में जन्मे धनपत राय श्रीवास्तव ने ‘प्रेमचंद’ नाम से हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में लेखन किया। उनके बाल्यकाल की कठिनाइयाँ, गरीबी, माता-पिता की असामयिक मृत्यु और जीवन के संघर्षों ने उनकी लेखनी को समाज के यथार्थ से जोड़ दिया। वे प्रारंभिक शिक्षा के बाद अध्यापन एवं अन्य नौकरियों में लगे, पर अंततः साहित्यिक रचनाओं की ओर उनका लगाव उन्हें ‘उपन्यास सम्राट’ की ऊँचाई तक ले गया। प्रेमचंद का साहित्य सन् 1900 के दशक के आरंभ में उर्दू भाषा से शुरू हुआ, आगे चलकर उन्होंने हिंदी को अपना माध्यम बनाया। उनका प्रथम हिंदी उपन्यास ‘सेवासदन’ (1918) वेश्यावृत्ति और महिला उत्पीड़न की सामाजिक चुनौतियों को उजागर करता है वहीं ‘प्रेमाश्रम’ (1922) किसान आन्दोलनों और जमींदारों के शोषण पर केंद्रित है। ‘‘रंगभूमि’’ में सूरदास जैसे अंधे पात्र के माध्यम से समाज के विरोधाभासों को दर्शाया गया है, जबकि ‘गोदान’ भारतीय ग्राम्य जीवन का यथार्थवादी दस्तावेज है और ‘गबन’, ‘कर्मभूमि’, ‘निर्मला’ आदि उपन्यासों ने दहेज, अनमेल विवाह, जातिभेद, छुआछूत, विधवा जीवन, सामाजिक भेदभाव, और आर्थिक शोषण पर करारी चोट की। तीन सौ से अधिक कहानियाँ, अनगिनत निबंध, आलोचनात्मक लेख, संपादकीय, और पत्र लेखन में अपनी लेखनी की धार को परखने वाले प्रेमचंद का साहित्यिक जीवन स्वाधीनता संग्राम, समाज सुधार आन्दोलनों और प्रगतिशील लेखन की मिसाल बन गया। उन्होंने ‘हंस’ पत्रिका एवं ‘जागरण’ समाचार पत्र का संपादन किया, फिल्मों के लिये कथा लेखन किया और प्रगतिशील लेखक संघ के पहले अध्यक्ष बने। उनकी मुख्य रचनाएँ जैसे ‘कफन’, ‘पूस की रात’, ‘पंच परमेश्वर’, ‘बड़े घर की बेटी’, ‘महाजनी सभ्यता’, ‘बूढ़ी काकी’, ‘दो बैलों की कथा’ आदि हिंदी साहित्य को अमूल्य भेंट हैं, जिनमें जीवन की सच्चाई, संघर्ष, सहानुभूति तथा संवेदनशीलता का ताना-बाना है। प्रेमचंद के अनुसार साहित्य का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन न होकर सामाजिक परिवर्तन और सुधार भी है, अतः उन्होंने अपनी रचनाओं में वंचित, शोषित, पीड़ित और दलितों को स्वर दिया। प्रेमचंद प्रभावशाली वक्ता, जागरूक नागरिक और गंभीर विचारक भी थे, उनका विश्वास समाज को बेहतर बनाने में साहित्य की भूमिका को लेकर अटल था। प्रेमचंद ने भारतीय समाज की जड़ताओं, समस्याओं और अंतर्विरोधों को कलम के माध्यम से उजागर कर साहित्य को जनजागरण का माध्यम बनाया तथा समत्व, करुणा और परिवर्तन की प्रेरणा दी। उनकी पुण्यतिथि पर उनके साहित्यिक, सामाजिक और वैचारिक योगदान को स्मरण करना केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपने दायित्व का पुनः बोध है, क्योंकि ‘प्रेमचंद युग’ बना रहना हिंदी साहित्य के लिए प्रगतिशील चेतना का अमूल्य स्रोत है।

— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह सहज

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।