व्यवस्था पर क्या ध्यान नहीं है?
राजा राजा कहकर किसी को
इतना भी न चढ़ाओ कि
वह अपनी मर्यादा भूल जाए,
तुम्हें अपनी प्रजा समझकर
कर्तव्य भूल सताए,
गए दौर राजे रजवाड़े के,
अब आज का दौर संविधान का है,
प्रजातांत्रिक विधान का है,
जिन्हें राजा कह रहे हो
वो अब तुम्हारा सेवक है,
जिनका काम संवैधानिक दायरे में रह
अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना है,
न कि खुद को मालिक समझ
किसी का भी गर्दन पकड़ना है,
किसको क्या करना है
नियम सबका बना हुआ है,
मगर बहुत भी ऐसे हैं जो
पद पाकर के तना हुआ है,
राजा किसी को कहना ही है तो
वो है देश की सारी जनता,
लेकिन वे बांधे हाथ खड़े हैं
लेकर के अपनी निर्धनता,
विधानों से परे जाकर के
करना कोई काम नहीं है,
वरना जनता यही कहेगी
व्यवस्था पर क्या ध्यान नहीं है।
— राजेन्द्र लाहिरी
