ओ चंदा !
छुप करके बादलों की ओट में देखो तुम मत सताना,
ओ चंदा ! सुनो आज तुम थोड़ी जल्दी निकल आना ।
सजधज कर प्रियतमा मेरी बैठी हैं तुम्हारे इंतजार में,
रखा है करवा चौथ का निर्जल व्रत आज मेरे प्यार में,
सुबह से ही उसने कर रखी हैं धूमधाम से सारी तैयारी,
लाल चूड़ा पहना और हाथों में लगाई है मेहंदी प्यारी,
सांझ हो रही अमृत किरणों को तुम हम पर बरसाना,
ओ चंदा ! सुनो आज तुम थोड़ी जल्दी निकल आना ।
देखकर सजनी के चेहरे की चमक मैं इठला रहा हूॅं,
ईश का धन्यवाद मैं ख़ुशी से ये जीवन बीता रहा हूॅं,
ऑंच मेरे इस जीवन पर तनिक कभी भी ना आऍं,
उसकी उम्र मुझे लग जाऍं मॉंगती वो कितनी दुआऍं,
दीप की लौ संग चालनी के बीच में प्रेम रंग छलकाना,
ओ चंदा ! सुनो आज तुम थोड़ी जल्दी निकल आना ।
तन-मन जीवन में मेरे “आनंद” प्रेम संगीत भर जाती,
पायल की छनछन और सिंदूर की लाली मुझको भॉंति,
आशाओं के ऑंगन में मधुबन सा सजा परिवार हमारा,
विश्वास सत्य सहयोग की नींव पर टिका गठबंधन प्यारा,
सप्तपदी के इस अटूट बंधन को और भी सुंदर सजाना,
ओ चंदा ! सुनो आज तुम थोड़ी जल्दी निकल आना ।
— मोनिका डागा “आनंद”
