आंखों में सपने ज़रूरी है
आसमान की छांव में
एक परिंदा उड़ता है
सपनों के संग
बहार की खुशबू से
मitti की नमी में घुलते
सपने खिलते हैं
चाँद की चाँदनी में
नींद और जाग्रति के बीच
सपनों का दीपक
हवाओं की सरसराहट
मन की गहराई तक जाती
अदृश्य राह दिखाए
सूरज की पहली किरण
सपनों को सुनहरे रंग में
रंग देती है धीरे-धीरे
पानी की बूँदों में
छोटे-छोटे सपने
मोतियों की तरह चमकते
पेड़ों की पत्तियों पर
सपनों की छाया गिरती
हल्की मुस्कान बनकर
सपनों की दुनिया में
हर क्षण नया संदेश
जीवन को संवारता है
पर्वतों की चोटियों पर
सपनों की ऊँचाई
हमेशा बुलाती है
नदी की लहरों में
सपनों की आवाज़
मौन में भी गूंजती है
रात की तन्हाई में
सपनों का संगम
मन को सहलाता है
आखों में सपने ज़रूरी है
हर कदम में, हर साँस में
जीवन की रोशनी बनते
— डॉ. अशोक
