कविता

प्रकाश का पर्व : दीपावली

दीपों का ये पर्व है निराला,
हर घर में छाए उजियाला।
अमावस की रात में चमके दीया,
हर मन गाए प्रेम का जिया।

रामचंद्र जब लौटे वन से,
चौदह बरस बिताए बन से।
अयोध्या वासी ने दीप जलाए,
राम-सीता का स्वागत पाए।

यही है दीपावली की बात,
सदियों से चलती परंपराओं की बात।
अंधकार पर जब होती जीत,
तभी मनाते दीपों की रीत।

लक्ष्मी माता आतीं द्वार,
संग में लातीं सुख-सम्पार।
धन, समृद्धि, शांति का वास,
हर मन में हो प्रेम प्रकाश।

गणेश जी का हो पूजन,
बिना उनके नहीं शुभ आरंभन।
वो देते हैं बुद्धि-विवेक,
सच्चे पथ पर चलना नेक।

धनतेरस से मेला छाए,
हर गली, हर घर मुस्काए।
नरक चतुर्दशी लाए शुद्ध विचार,
दीप जलाएं, करें संहार।

फिर आती अमावस रात,
हर कोना रोशन, हर बात खास।
पटाखों से न हो शोर बड़ा,
प्रकृति बचाना भी है सदा।

गोवर्धन पूजा, अन्नकूट त्योहार,
कृष्ण भक्ति में लगे परिवार।
अन्न की महिमा सब समझें,
धरती माता को नमन करें।

भाई दूज का प्रेम प्रसंग,
बहन-भाई का पावन संग।
स्नेह, विश्वास, रिश्तों का प्यार,
दीपावली का यही उपहार।

चलो जलाएँ दीप विचारों के,
प्रेम बाँटें हर एक द्वारों पे।
दीपावली का यही संदेश,
सच्चाई, सद्भावना और विशेष।

— रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com