ग़ज़ल
लो खुशी के अभी गीत गाते रहो।
मुस्कुरा कर दिवाली मनाते रहो।।
पूजना आज लक्ष्मी तभी आएगी।
भोग देखो सभी ही चढ़ाते रहो।।
आज तोरण बनाना खुशी से सभी।
देख लो आज आँगन सजाते रहो।।
अब धरो दीप ही देहरी पर सुनो।
राह भूले न कोई जलाते रहो।।
हो सुखों का अभी राज दिल पर सदा।
प्यार से रोशनी तुम लुटाते रहो।।
ले पटाखे चलो तुम अभी बाग में।
फुलझड़ी संग चकरी चलाते रहो।।
हो न जाना कभी सोच स्वार्थी सुनो।
दुख सभी के तुम्हीं ही बँटाते रहो।।
लो मिठाई सभी को अभी बाँट दो।
है दिवाली मनी यह बताते रहो।।
देख ग़मगीन हैं जो उदासी भरे।
प्यार की पींग तुम ही झुलाते रहो।।
— रवि रश्मि ‘अनुभूति’
