त्यौहार के बाद
त्यौहार के बीतते ही
घर की खुशियाँ जो मेहमान बन आईं थी
फिर वापस लौट चली
आखिर मेहमान ही तो थे
उन्हें जाना ही था
हम फिर अकेले के अकेले ही रह गए
रह गई उन क्षणों की यादें
वह पल जो उनके साथ बिताये
उन्हें अब हम घर के कोने कोने में ढूंढ फिर रहे
अकेले बैठ कभी चेहरे पर मुस्कान छा जाती
कभी उदासी की चादर
