कविता

छठ पर्व

छठ पर्व पर प्रेम का अहसास है,
भक्ति, श्रद्धा और विश्वास है।
नदियों का संगम, प्रकृति का श्रृंगार,
हर घर में बजता है अब जय-जयकार।

सूरज देव का यह महा उत्सव है,
हर मन में उमंग, हर दिल में नव रस है।
कार्तिक मास में आता ये त्योहार,
घर-आँगन में होता उजियारा अपार।

मिट्टी के दीए जगमग जलते हैं,
हर दिल में छठ मइया बसते हैं।
भोर भये जब सूरज निकले लाल,
व्रती करें अर्घ्य, झुके हर भाल।

ठेकुआ, फल, फूल, गंगा का जल,
सब अर्पण होता सच्चे मन का फल।
छठ मइया सबकी झोली भर देती हैं,
मन की हर मुराद पूरी कर देती हैं।

सुख-शांति का संदेश ये लाती हैं,
भक्ति की राह दिखा जाती हैं।
हर जीवन में उजियारा भर दे,
छठ मइया सबका जीवन सुंदर कर दे।

— गरिमा लखनवी

गरिमा लखनवी

दयानंद कन्या इंटर कालेज महानगर लखनऊ में कंप्यूटर शिक्षक शौक कवितायेँ और लेख लिखना मोबाइल नो. 9889989384