लघुकथा

संस्कृति

शहर से गाँव में आयी मोहिनी ने चौपाल पर लोकगीत, ढोलक की थाप पर थिरकते बच्चे, जवान, बूढ़े देख खिलखिला कर हँस पड़ी। उसके पैर भी थिरकने लगे। उसने दादी से कहा,”दादी! दुनिया अब बहुत आगे बढ़ चुकी है। इनका कोई स्थान नहीं है।”
दादी गले लगाते हुए बोली,”है बिटिया! सबके साथ मिलकर खुल कर हँसना और दुख-सुख बाँटना।”
“सच दादी! आज महीनों बाद जी खोलकर हँसी हूँ। ये परम्पराएँ ही हमारी साँसें हैं। “

— डाॅ अनीता पंडा ‘अन्वी’

*डॉ. अनीता पंडा

सीनियर फैलो, आई.सी.एस.एस.आर., दिल्ली, अतिथि प्रवक्ता, मार्टिन लूथर क्रिश्चियन विश्वविद्यालय,शिलांग वरिष्ठ लेखिका एवं कवियत्री। कार्यक्रम का संचालन दूरदर्शन मेघालय एवं आकाशवाणी पूर्वोत्तर सेवा शिलांग C/O M.K.TECH, SAMSUNG CAFÉ, BAWRI MANSSION DHANKHETI, SHILLONG – 793001  MEGHALAYA aneeta.panda@gmail.com