दोहावली
१)
जोते मिट्टी प्रेम से, बोये बीज किसान।
हलधर हिय हर्षित हुआ, देख डोलता धान।।
२)
कूड़ा करकट फेंकते, दूषित करे जहान।
रोग नये नित पालते, तन मन रहे थकान।।
३)
स्वस्थ मस्त रहना हमें, स्वच्छ रखे जल वायु।
मानव हित रक्षक बने, मिले स्वास्थ्य दीर्घायु।।
४)
करुणा संयम चेतना, जीव दया सत्धर्म।
मानव जीवन सार्थ हो, कल्याणी सत्कर्म।।
५)
धर्म मर्म मनु जान लें, कभी न हो पथभ्रांत।
सेवा का मेवा मिले, हरपल मन हो शांत।।
