गीतिका/ग़ज़ल

बस यूँ ही

क्यों हमें आप यूँ सताते हैं
हम तो हर ग़म में मुस्कुराते हैं।

आप ये तो बताइए हमको
भूल जाते हैं या भुलाते हैं।

कर तो लेते हैं वादे वो लेकिन
सारे वादे कहाँ निभाते हैं।

हमने उनको तो टूट कर चाहा
अपनी चाहत मगर छुपाते हैं।

वो जो बसते हैं मेरी आँखों में
दूसरा क्यों जहाँ बसाते हैं।

— सविता सिंह मीरा

*सविता सिंह 'मीरा'

जन्म तिथि -23 सितंबर शिक्षा- स्नातकोत्तर साहित्यिक गतिविधियां - विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित व्यवसाय - निजी संस्थान में कार्यरत झारखंड जमशेदपुर संपर्क संख्या - 9430776517 ई - मेल - meerajsr2309@gmail.com