कविता

सवेरे की सौगात

सुबह की प्रकृति है एक कोमल गीत,
हर किरण में बसता है जीवन का मीत।
ओस की बूँदें, जैसे मोती हों धरती पर,
हवा भी चलती है प्रेम की लहर भर।

पंछी चहचहाते हैं स्वागत में प्रभात का,
फूलों से महकता है आँगन दिन के साथ का।
सूरज मुस्काता है पहाड़ियों के पार,
मानो कहता हो — “जग जा अब संसार।”

पेड़ों की शाखों पर नाचते हैं सपने,
हर पत्ता कहता है — “चलो कुछ अपने।”
नदी की कल-कल भी गुनगुनाती है बात,
जैसे कोई माँ सुना रही हो सौगात।

सुबह की ये प्रकृति, शांत, पावन, नई,
हर दिल में भरती है उम्मीदें कई।
जो समझ सके इसकी मौन ज़बान,
उसे मिल जाए जीवन का वरदान।

— डॉ. मुल्ला आदम अली

डॉ. मुल्ला आदम अली

जन्म तिथि : 26 सितंबर तिरुपति, आंध्र प्रदेश शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी., डी.एफ़.ए.च एण्ड टी., एचपीटी., वेबसाइट ; https://www.drmullaadamali.com यूट्यूब चैनल; https://youtube.com/@drmullaadamali प्रकाशित कृतियाँ : "मेरी अपनी कविताएं" "हिंदी कथा-साहित्य में देश-विभाजन की त्रासदी और सांप्रदायिकता" "युग निर्माता प्रेमचंद और उनका साहित्य", "नन्हा सिपाई", 24 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेख प्रकाशित, 30 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भाग लिया गया है, कई पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां और कविताएं प्रकाशित। पुरस्कार व सम्मान : एंटी करप्शन फाउन्डेशन द्वारा “नेशनल एजुकेशन आइकन अवॉर्ड – 2019” सोसाइटी फॉर यूथ डेवलेपमेंट द्वारा “स्वामी विवेकानंद युवा सम्मान – 2019”, विश्व संवाद परिषद की ओर से हिंदी साहित्य एवं काव्य सभा (प्रकोष्ठ) के लिए अवैतनिक प्रदेश अध्यक्ष (आंध्र प्रदेश) 2021.