पापा जैसे आपकी मर्जी
सुबह की धूप में
पापा की सीख चमके
राहें आसान।
धीमी हवाओं में
उनकी बोली की गर्मी
मन को संवारें।
चलते कदमों में
उनका साहस मिलता
डर दूर भागे।
बरसात आए जब
उनकी छतरी बनती
ममता की छाया।
ठंडी रातों में
उनकी हँसी जगाती
दिल की उजियारी।
पापा की बातें
सीढ़ियाँ बनकर दें
ऊँचे सपनों को।
गलत राहों से
वो धीरे मोड़ लेते
बिन डाँट–फटकार।
मेरी उलझनों में
उनकी चुप मुस्कान
सब हल कर देती।
पापा जैसे हों
हर चाहत की मंज़िल
मन की रोशनी।
आपकी मर्जी पर
ये जीवन चल पड़ता
विश्वास समेटे।
पापा के साये में
हर मौसम सुंदर
हर कदम सही।
— डॉ. अशोक
