नफरत नहीं प्रेम करो
नफरत नहीं प्रेम करो, समझ जीवन का सार।
संसार मुट्ठी में बाॅंध ले, यह जीवन दिन चार।
कहाॅं से आए कहाॅं है जाना हैं मुसाफिर आज।
सुबह किसने है देखी यहाॅं जब भी पड़ती रात।
भेदभाव पाखंड में मत उलझो , सुन यह बात।
अमन चैन के दौर में , मत करना असुरी घात।
मानव जाति एक है, ईश्वर ने रचा यह संसार।
नफरत नहीं प्रेम करो, समझ जीवन का सार।
मेरा मेरी छोड़ दे, वृथा ईर्ष्या द्वेष अरु अहंकार।
मिलकर रहना प्यार बांटना, सत्य इसे स्वीकार।
ईश्वर ने खुशियां दी इतनी, उसका कर आभार।
उसकी नजर में एक सभी है, क्यों करें तकरार।
दीन दुखी की सेवा करना तब होगा बंदे उद्धार।
नफरत नहीं प्रेम करो, समझ जीवन का सार।
जीव जन्तु मालिक के जाए, करें बसेरा साथ।
करें संरक्षण उनका मन से, दे कर अपना हाथ।
तेरे किये कर्म का लेखा, नित लिखते हैं नाथ।
कर्म करिये सुथरा मन से, चलिए सत्य के पाथ।
झंझावात कितने भी आएं, मानो नहीं तुम हार।
नफरत नहीं प्रेम करो, समझ जीवन का सार।
— शिव सन्याल
