मुक्तक/दोहा

दोहावली 

१)

आग लगी प्रतिशोध की, कैसे होगी शान्ति।

दया क्षमा की भावना, करुणा की हो कांति।।

२)

विद्यार्थी अभ्यास से, पाता कौशल ज्ञान।

मिलता सतत प्रयास से, सुयश कीर्ति सम्मान।।

३)

अंधभक्ति के जाल में, फँसते भोले लोग।

मंत्र-तंत्र की आड ले, बाबा करते जोग।।

४)

डरो नहीं बढते चलो, कर में धरो त्रिशूल।

सर्वनाश हो दुष्ट का, आँसू बनते फूल।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८