लघुकथा

नया मोड़ 

पुणे मुंबई शिवनेरी बस में रागिनी सफर कर रही थी। हिन्दी साहित्यिक कवि मंच की ओर से उसे ससम्मान निमंत्रण मिला था। लोनावाला के आगे सफर में प्रकृति के सुंदर नजारों का आनन्द लेते उसका कवि हृदय पुलकित हो रहा था। अंतर्मन के उद्गार वह अंकित करते गुनगुनाने लगी। सुंदर भाव, सुरीली आवाज। मृदुल स्वर धीरे-धीरे कब पास बैठी विदुषी महिला सहयात्री ने सुना, वह समझ ही न पाई। 

“आदरणीया, क्या मैं आपका शुभ नाम जान सकती हुँ?”

अनजान महिला ने इतने अपनेपन से पुछा तो वह झट से उससे बतियाने लगी। पता चला, सहयात्री सीमा जी खुद भी कवयित्री है। सम्मेलन में उनकी प्रस्तुति है।

“बहुत अच्छा लिखती हो आप। मैं आपकी रचनाएं पढती हुँ।” रागिनी ने कहा।

“और आप भी। और गाती भी अच्छा हो। स्वर सुरमई है आपका।”

” सुरम्य प्रकृति दर्शन से भाव आप ही प्रकट हो गये।”

” सही कहा। बहुत ही मनहर है यह घाटी। बारिश में झरनों का संगीत इसे और खूबसूरत बना देता है।”

संयोजन, संचालन, कार्यक्रम स्थल बहुत स्तरीय और भव्य था। सीमा जी के काव्य पाठ से वह अभिभूत थी। कार्यक्रम लगभग समाप्ति की ओर बढ रहा था।

” अब नवोदित कवयित्री रागिनी जी, अपनी सुंदर रचना हमारे सामने प्रस्तुत करेगी। वह हमें लोनावाला खंडाला घाटी की सैर करायेगी।”

इस अनपेक्षित बुलावे से वह अचंभित थी। सीमा जी ने इशारे से उसे मंच पर बुलाया। 

” कल की रचना प्रस्तुत कीजिए।” सीमा जी ने कहा।

सहमी सी वह मंच पर आई। मंच पर विराजमान दिग्गज साहित्य शिरोमणि यों को वंदन कर अपनी सुरीली आवाज में अपनी रचना प्रस्तुत की। तालियों की गूँज के साथ सबने उसे अपने आशीर्वाद दिए। 

अचानक हुई मुलाकात  ने उसे नई पहचान दी। मंच पर प्रस्तुति देते आज भी वह सीमा जी को मन ही मन धन्यवाद देती है। नमन करती है।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८