लाडला
इधर कई महीनों से माँ का फोन नहीं आ रहा था, मैसेज का भी जवाब नहीं देती है । ऐसा गुस्सा किस काम का जो अपनी ही संतान से मुंह मोड़ ले ! जरा सा धैर्य नहीं है माँ के अंदर ।
उस दिन मैंने बस इतना ही कहा था –
“माँ आपको भारतीय समय और हमारे देश के समय में चार घंटे का अंतर है, याद क्यों नहीं रहता है । आधी रात में मुझे जगा देती हैं ।”
उन्हें समझना चाहिए कि उनका बेटा सी ई ओ है । ढेर सारी जिम्मेदारियां हैं हमारे ऊपर । खाली गपशप से परिवार नहीं चलता । यही सब सोचते हुए वह लैपटॉप पर काम छोड कर थोड़ी देर फेसबुक का नोटिफिकेशन और स्टोरी देखने लगा ।
“ओह यह क्या हो गया ? मामा जी आई सी यू में किसके पास खड़े हैं ।”
तुरंत मामा जी को फोन लगाने के लिए जैसे ही फोन हाथ में लिया व्हाट्स एप पर इतने सारे मिस्डकॉल एवं मैसेज देख कर दंग रह गया ।
फोन साइलेंट मोड पर रखने की आदत के ऐसे दुष्परिणाम होंगे अहसास तक नहीं रहा । मामा जी का मैसेज पढ कर उसने अपना सिर थाम लिया ।
दीदिया नहीं रही आखिरी वक्त में उसकी आँखें शायद तुम्हें ही ढूंढ रही थी ।
रूलाई फूट पड़ी पद-प्रतिष्ठा दौलत सब उसे चिढ़ाने लगे ।
माँ अक्सर उसे सोना बाबू ,राजा बेटा ,लाडला बेटा ,आँखों का तारा , कहते नहीं थकती थी ।
— आरती रॉय
