युद्ध
युद्ध !
नस -नस में चल रहा है
हर मन -मस्तिष्क में चल रहा है
युद्ध !
राजा और प्रजा में चल रहा है
दिन और रात में चल रहा है
युद्ध !
भगवान और शैतान में चल रहा है
अंधेरे और उजाले में चल रहा है
युद्ध !
रक्त के कण-कण में चल रहा है
सृष्टि के हर अणु -परमाणु में चल रहा है
युद्ध !
सत्य और असत्य के बीच चल रहा है
किसान और खेत के बीच चल रहा है
युद्ध !
जन्म और मृत्यु के मध्य चल रहा है
युद्ध का दूसरा नाम ही तो संसार है।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
