कविता

युद्ध

युद्ध !
नस -नस में चल रहा है
हर मन -मस्तिष्क में चल रहा है

युद्ध !
राजा और प्रजा में चल रहा है
दिन और रात में चल रहा है

युद्ध !
भगवान और शैतान में चल रहा है
अंधेरे और उजाले में चल रहा है

युद्ध !
रक्त के कण-कण में चल रहा है
सृष्टि के हर अणु -परमाणु में चल रहा है

युद्ध !
सत्य और असत्य के बीच चल रहा है
किसान और खेत के बीच चल रहा है

युद्ध !
जन्म और मृत्यु के मध्य चल रहा है
युद्ध का दूसरा नाम ही तो संसार है।

— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111