कविता

कुनकुनी धूप

ये कुनकुनी धूप और प्यारा तुम्हारा साथ
यूँ उम्र की ढलती दहलीज़ पे चाँद हो पास।

जब तक है श्वास है ये वादा और विश्वास
न छूटेगा इक पल तुम्हारा हाथ और आस।

आओ बैठो फुर्सत में बिताएं कुछ और पल
धूप का निर्मल स्पर्श निखरे हम आजकल।

कांपते हाथों से न डरो पकड़ो प्याला चाय का,
एहसास और जाने कब तक मिले संग साए का।

वक्त का क्या भरोसा जी लो ज़िंदादिली से
ये खुशनुमा समां और परिवार की खुशी में।

आओ अब सफ़र की थकान कम कर लें हम
जीवन के मुश्किल पलों को आसान कर लें हम।

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |