कविता

चंद अल्फाज़

आपमें सुशीलता है या नखरो नाज,
आपके मुंह से निकला चंद अल्फाज,
बयां कर जाता है आपका किरदार व अंदाज,
आपके रहन सहन का तरीका,
आपके जीवन जीने का सलीका,
ए आइ के जमाने में आज हम पहुंचे हैं भले,
मगर भांपने का तरीका रहा है पहले,
आपकी सोच, आपके मित्र,
आपके जीवन जीने का अंदाज और ये इत्र,
बहुत कुछ बता देता है,
आप इस धोखे में मत रहिए कि चरित्र को छुपा लेता है,
ये अल्फाज ही है जो दिलाता है मान सम्मान,
तो कभी दिलाता है रुसवाई और अपमान,
कब,कहां,कौन से शब्द कहने है लो जान,
समाज में रहकर ही सीखा जाता है ज्ञान,
दिख जाता है बहुत जगह पढ़ा लिखा गंवार,
जो नहीं जानता तहज़ीब और प्यार,
तो अल्फाजों को संभाल कर रखिए,
किसके सामने क्या बोलना है
आंखें खोलिए और देखिए।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554