आई बसंत
पीली सरसों
फूली सरसों
धानी चुनरिया
ओढ़े धरा
दिन लंबे छोटी रातें
ठंड विदा हो रही
सर्द गर्म के योग से
नव स्फुटन हो रहा
आ रहा बसंत
डाल डाल प्रफुल्लित हो रही
महक रही फूलों की सुगंध
बोराई सी बह रही
मंद मंद मस्त पवन
मौसम में घुली मादकता
अंग अंग में नशा घुल रही
