जीवन की मजबूत डोर बनूं
सुबह की धूप
कलाई पर बंधी
उम्मीद की रेखा
खामोश हवा
टूटी साँसों में
विश्वास भर दे
सूखा आँगन
एक बूंद हौसला
हरियाली लाए
झुकी पलकें
फिर भी सपनों की
ऊँची उड़ान
थके पाँव
फिर भी रास्ता
खुद बन जाए
अंधेरी रात
जुगनू सा मन
दिशा दिखाए
— डॉ. अशोक
