दोहा छंद
सदाचार सद्भावना, मानवता शृंगार।
धर्म-कर्म की संपदा, जीवन का आधार।।
हार जीत से मत डरो, करना सतत प्रयास।
लक्ष्य प्राप्ति विश्वास हो, सार्थक हो अभ्यास।।
सदाचार सद्भावना, मानवता शृंगार।
धर्म-कर्म की संपदा, जीवन का आधार।।
हार जीत से मत डरो, करना सतत प्रयास।
लक्ष्य प्राप्ति विश्वास हो, सार्थक हो अभ्यास।।