कविता

स्वतंत्रता से गणतंत्र तक

स्वतंत्रता से गणतंत्र तक का यह सफ़र बहुत शानदार,
संविधान हमारा देता है सबको एक समान अधिकार,
समूचे विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत देश हमारा,
विविधता में बसा आकर्षण भारत हमको सबसे प्यारा ।

वीरों ने दी थी कुर्बानियॉं दुश्मनों को उखाड़ बाहर फेंका,
बलिदान दे परतंत्रता के साम्राज्य को बढ़ने से था रोका,
आग़ाज हुआ फिर नए भारत का चमकी दसों दिशाएं,
लहराया जब तिरंगा ऊॅंचा चहक उठी करोड़ों आशाएं ।

कठिन परिस्थितियों से भिड़ भारत ने स्वयं को सम्हाला,
गूॅंज उठा शान से विश्व में यूॅं भारत का यश गान निराला,
26 जनवरी को मातृभूमि का वंदन गाकर उत्सव मनाते,
वीरों का भी कर अभिनंदन देशवासी आभार है जताते ।

वंदेमातरम् वंदेमातरम् वंदेमातरम् की दे अनोखी ताल,
“आनंद” बसा हो हर घर समृद्ध हो मॉं भारती का लाल,
बहती रहे विश्व बंधुत्व की भावना प्रबल प्रेममय गंगा,
बढ़ता रहे मेरा भारत आगे लहर- लहर लहराएं तिरंगा ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु