जानकारी जरूरी है
किसी और शहर जाने के लिए
एक खास नाम का बस विनय था,
जिसके आने जाने का समय तय था,
मुझे इंतजार में कुछ वक्त बिताना था,
मैं सामने बैठे बुजुर्ग के पास आया,
नमस्ते करते हुए बतियाया,
अंकल जी अपना हालचाल बताइए,
कुछ अच्छी बात सुनाइए,
तब वह अनवरत बोलता रहा,
बीच बीच कभी गुस्सा और प्यार से डोलता रहा,
उन्होंने बुद्ध के बारे में विस्तार से सु ताया,
ज्ञान विज्ञान के उनके मार्ग को बताया,
कभी कबीर जी के बारे में,
कभी रैदास जी के बारे में,
कभी गुरू नानक देव जी के बारे में,
कभी ज्योतिबा, सावित्रीबाई फुले के बारे में,
कभी झलकारी बाईं के बारे में,
कभी नारायणा गुरू के बारे में,
कभी तिलका मांझी के बारे में,
कभी बिरसा मुंडा जी के बारे में,
कभी बाबा साहेब के बारे में,
तो कभी कांशीराम जी के बारे में बताया,
ये सारी जानकारियां मुझे पता नहीं था
सब सुनकर मैं धन्य हो गया,
मन मेरा खाली से चैतन्य हो गया,
बेटा फिर कभी खाली समय लेकर आना,
विस्तार से हमारे महापुरुषों के बारे में सुनकर जाना।
— राजेन्द्र लाहिरी
