फल ही खाना
मम्मी, मैं तो जूस पिऊँगी,
मुझे न अच्छे लगते फल।
जल्दी है,पी रही जूस हूँ,
छोड़ो, कल खा लूँगी फल।
माँ भी समझ गई चालाकी,
गुड़िया करती रोज बहाना।
फलों के जूस से अच्छा होता,
ताजे – ताजे फल नित खाना।
फलों में विटामिन – फाइबर ज्यादा,
तन को दें संतुलित कैलोरी।
दो घंटे तक भूख न लगती,
नहीं सताती है कमजोरी।
वजन नियंत्रित करते हैं फल,
रक्त शर्करा धीरे बढ़ती।
लंबे समय ऊर्जा मिलती,
मन पर चढ़ती नहीं खुमारी।
पैकेट बंद जूस न उत्तम,
भले ही स्वाद – मजा हम पाते।
फाइबर – विटामिन कम मिलते हैं,
लवण – शर्करा वजन बढ़ाते।
माँ ने कहा -” दुलारी बिटिया,
चाह रही क्या वजन बढ़ाना।”
गुड़िया बोली – “कान पकड़ती,
जूस न पीना, फल ही खाना।”
— गौरीशंकर वैश्य विनम्र
