मुक्तक/दोहा

जानते हैं हम

जानते हैं बिल्ली को कुत्ते से लड़ाना,
शांति के पुजारी को आतंकी बताना।
धर्म और संस्कृति की बातें भुलाकर,
सत्ता की खातिर, रिश्तों को निभाना।

जानता हैं बहरों को सुनाना, गूंगों का गाना,
दूध की रखवाली पर, बिल्ली को बैठाना।
पालते हैं सपने, हम शेखचिल्ली से हरदम,
देश की सुरक्षा हित, भ्रष्टाचार का पैमाना।

जानते हैं देश के संशाधनों को लुटाना,
आतंकी भ्रष्टाचारियों पर चुप्पी लगाना।
परिवार के प्रति निष्ठा राष्ट्र से भी आगे,
कश्मीरी अलगाववादियों से दोस्ती निभाना।

— डॉ. अ. कीर्तिवर्धन