कविता

तुमसे मिलना

तुमसे मिलना
जैसे सूर्य रश्मियां ,
आई हो आंगन में ।
जैसे कोई चिड़िया
उड़ी हो आसमान में ।
फूटा हो कोई कोंपल ,
हिचकी आई हो
किसी की याद में।
तुमसे मिलना
जैसे
आ गया हो
नील गगन में चाँद।
तुमसे मिलना
जैसे मिलना
खुद का
खुद ही से।

— विकास कुमार शर्मा

विकास कुमार शर्मा

पुत्र- स्व. श्री भगवान सहाय शर्मा माताजी का नाम - श्रीमती सरस्वती देवी शर्मा जन्म तिथि- 24 अक्टूबर 1982 शैक्षिक योग्यता - एम.ए.(हिंदी) , बी.एड. एम.ए.(शिक्षा) साहित्यिक गतिविधियां सन 2003 में जयपुर दूरदर्शन के कल्याणी कार्यक्रम में प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ स्लोगन रचनाकार के रूप में सम्मानित । सन 2015 में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति जुबिन इरानी द्वारा सी.बी.एस. ई. के हिंदी विषय के सर्वश्रेष्ठ परीक्षा परिणाम हेतु सम्मानित । अनेक पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित पता- 35/338 , शिवपुरी - बी गंगापुर सिटी, जिला -सवाईमाधोपुर ,राजस्थान-322201 फोन-07665150750 Email-vikasggc82@gmail.com