रोटी गरम बाजरे वाली
रोटी गरम बाजरे वाली।
सरसों की भुजिया से खा ली।।
जाड़े के ये अनुपम भोजन।
करते नया स्वाद संयोजन।।
हरी मटर की बजती ताली।
रोटी गरम बाजरे वाली।।
साग चने का लगे निराला।
सोंधा – सोंधा गरम मसाला।।
महकी हरी भपीली थाली।
रोटी गरम बाजरे वाली।।
आलू नया रसीला न्यारा।
लाल टमाटर के संग प्यारा।।
प्रातराश फिर बेड़ई दाली।
रोटी गरम बाजरे वाली।।
सोंधी खीर शकरकंदी की।
संतति खाती गुलनंदी की।।
भुने सिंघाड़े की छवि काली।
रोटी गरम बाजरे वाली।।
‘शुभम्’ शीत ऋतु है मनभाई।
ओढ़े कम्बल और रजाई।।
स्वेटर शॉल किसी ने डाली।
रोटी गरम बाजरे वाली।।
— डॉ. भगवत स्वरूप ‘शुभम’
