बेटियां और समृद्धियां
जिस घर में जन्मती हैं बेटियां
उस घर में आती हैं समृद्धियां।
गया समय, जब पुत्र जन्म पर
घर-घर में बजती थीं थालियां।
अब तो पुत्री के जन्म पर भी
हर-घर में मनती हैं दिवालियां।
जिस-जिस घर में जब कभी
जल कर मारी गई थीं पुत्रियां।
इतिहास पढ़ लो उन घरों का
वो घर, हो गए हैं दिवालिया।
बेटियां जब स्व-घर आती हैं
खुल कर होती हैं शोखियां।
— चन्द्र शेखर शर्मा चंद्रेश
