इस वक्त मैं
बड़े बड़े अधिकारियों के
रहमोकरम पर डोल रहा हूं,
साथियों मैं इस वक्त
सूरजपुर से बोल रहा हूं,
हर पहुंच कार्यालय में
मेरा हरदम नाम होता है,
इधर से उधर हिस्सा निकाल
पहुंचाना मेरा काम होता है,
अब घर में रहूं या कार्यालय में
मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है,
अरे आपका भाई बिंदास है
कभी किसी से नहीं डरता है,
मुझसे डरते मेरे सारे साथी हैं,
दूल्हा कोई और रहे पर
आपका भाई होता सबसे पहला बाराती है,
पैसे की बात आ जाए तो
मेरा जिगरी भी एतबार नहीं करता है,
आपका भाई कुछ जन्मजात जलवे धरता है,
मगर सोच रहा हूं कि
सेवानिवृत्त पश्चात
क्या कोई मुझे पहचानेगा,
निस्वार्थ वाला सहकर्मी मानेगा,
अरे जाने भी दो यारों
अभी अपने पत्ते नहीं खोल रहा हूं,
साथियों मैं इस वक्त
सूरजपुर से बोल रहा हूं।
— राजेन्द्र लाहिरी
