कविता

नहीं किसी की करो बुराई

अपनी चाहो आप भलाई।

कभी नहीं तुम करो ढिठाई ।।

समय नहीं अब ऐसा भाई।

नहीं किसी की करो बुराई।।

सबके हित में काम भलाई।

निज स्वारथ होता दुखदाई।।

मर्यादा  संग  करो  भलाई।

मिथ्या नहिं होता सुखदाई।।

भाग-दौड़  जीवन  का  हिस्सा।

अलग-अलग है सबका किस्सा।।

मिलती  अपनी  कर्म  कमाई।।

जोड़   घटाना  पाई-पाई।

जीवन मानो तो भारी है,

यारों से इसकी यारी है।।

जैसी जिससे जाय निभाई।

नहीं किसी की करो बुराई।।

प्रेम प्यार सद्भाव निभाना।

जो गाते नित इसका गाना।।

होती जग में नहीं हँसाई।

नहीं किसी की करो बुराई।।

सदा कुसंगति दूरी रखना।

ईर्ष्या द्वेष सदा ही तजना।।

हर संभव तुम करो भलाई।

नहीं किसी की करो बुराई।।

सदा साथ जो नहीं आप निभाते।

धोखा दे खुद को क्या पाते।।

सोचो किसकी हुई बड़ाई।

नहीं किसी की करो बुराई।।

बैर-भाव जितना भी रख लो।

धन-दौलत का अमृत पी लो।।

नींद चैन सुख की कब आई।

नहीं किसी की करो बुराई।।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921