सामाजिक

रंगों में प्रेम हो, अभद्रता नहीं

भारतवर्ष वह पावन भूमि है जहाँ त्योहार केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक तरफ जहां हमारे भीतर के उमंग, उल्लास एवं उत्साह को उजागर करता है तो वही दूसरी तरफ संस्कृति, संस्कार और सभ्यता को जन्म देता हैं। भारत की भूमि तो वो पवित्र भूमि है जहां पर एक से बढ़कर एक ऋषियों ने , महर्षियों ने , राजर्षियों ने, संतों ने , सुधारकों ने , योगियों ने ,अवतारों ने एक बार नहीं बल्कि अनेकों बार इस भूमि पर आकर इस भूमि को पवित्र एवं धन्य बनाया है| उनके तप, त्याग , तितिक्षा ने विश्व मानवता को एक नई दिशा प्रदान की है|
यहाँ हर पर्व हमें जीवन जीने की नई दिशा देता है और समाज में प्रेम, सद्भाव व भाईचारे का संदेश फैलाता है। इन्हीं महान पर्वों में से एक है — होली, जो रंगों के माध्यम से दिलों को जोड़ने और मन के भेदभाव को मिटाने का संदेश देती है।
होली का असली अर्थ केवल रंग खेलना नहीं, बल्कि रिश्तों में मिठास घोलना और मन के अंदर छिपे अहंकार व नकारात्मकता को दूर करना है। जब हम प्रेम, सम्मान और मर्यादा के साथ होली मनाते हैं, तब यह त्योहार समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है। लेकिन जब इसमें अभद्रता, अश्लील मज़ाक या ज़बरदस्ती शामिल हो जाती है, तो त्योहार की पवित्रता कहीं खो जाती है।
हमें समझना होगा कि सच्ची होली वही है जिसमें हर व्यक्ति सुरक्षित, सम्मानित और खुश महसूस करे। किसी की इच्छा के विरुद्ध रंग लगाना, अपमानजनक व्यवहार करना या अशोभनीय शब्दों का प्रयोग करना — यह हमारी संस्कृति और सभ्यता के खिलाफ है। अगर हम दूसरों की भावनाओं का सम्मान करते हुए होली मनाएं, तो यह पर्व और भी सुंदर और यादगार बन जाता है।
आज आवश्यकता है कि हम नई पीढ़ी को एक आदर्श और सभ्य होली का संदेश दें — प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, नशामुक्त वातावरण और शालीनता को अपनी पहचान बनाएं। ऐसी होली, जिसमें हंसी हो लेकिन किसी का दिल न दुखे; मस्ती हो लेकिन मर्यादा के साथ।
आइए इस होली हम सब मिलकर संकल्प लें — रंगों में प्रेम घोलेंगे, सम्मान को अपनाएंगे और अभद्रता को दूर रखेंगे। क्योंकि असली होली वही है, जिसमें हर चेहरे पर मुस्कान हो और हर दिल में अपनापन।

— विशाल सोनी

विशाल सोनी

शिक्षा-MCA पेशा- शिक्षक वैशाली (बिहार) 8051126749