गीत/नवगीत

वृद्धावस्था

यह मत सोचें कि वृद्धावस्था
अपने आप में एक सजा है
सच बात तो यह है मित्रों कि
हर उम्र का अपना अलग ही मजा है।

अब न ज्यादा कुछ जिम्मेदारी
और न ही किसी के प्रति जवाबदारी
‌ अपनी मर्जी के मालिक हैं हम
अपनी इच्छानुसार सब काम करना है

अब न कोई छुट्टी का झंझट
और न ही लक्ष्यों का पहाड़ खड़ा है
सच बात तो यह है मित्रों कि
हर उम्र का अपना अलग ही मजा है।

खुल कर इस दौर का आनंद लीजिए
ज्यादा किसी से न शिकायत कीजिए
वक्त के साथ सामंजस्य बिठा कर
निज उर में उल्लास भर लीजिए

अब न कार्यालय जाने की हड़बड़ी
न डांट का डर,‌ न मुंह लटका पड़ा है
सच बात तो यह है मित्रों कि
हर उम्र का अपना अलग ही मजा है।

युवा अवस्था की भाग दौड़ भी
कुछ कम चुनौती पूर्ण तो न थी
अपनी शख्सियत को ही भूल बैठे थे
जो कीमत चुकाई, कुछ कम तो न थी

अब आपके पास समय ही समय है
व भविष्य संभावनाओं से भरा पड़ा है
सच बात तो यह है मित्रों कि
हर उम्र का अपना अलग ही मजा है।

इत्मिनान से अपने काम निपटाइये
जो है बस उसमें ही खुश हो जाइये
लम्बी- लम्बी योजनाएं न बना कर
परिवार व दोस्तों संग समय बिताइये

अमूल्य हैं जीवन के यह पल
अनुभव का पिटारा भरा पड़ा है
सच बात तो यह है मित्रों कि
हर उम्र का अपना अलग ही मजा है।

उम्र का दौर चाहे कोई भी हो
कुछ न कुछ चुनौती तो सदैव रहेंगी
इनसे उचित तारतम्य बैठाने का
नाम ही तो है वास्तविक ज़िन्दगी

अब तक जिसने नैया पार लगाई
आगे भी बस उसका ही आसरा है
सच बात तो यह है मित्रों कि
हर उम्र का अपना अलग ही मजा है।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई