कविता

गणपति

प्रथम पूज्य हैं श्री गणेशा।
बुद्धि प्रदाता विध्न विनेशा।।
मूषक वाहन जिनके नामा।
मोदक प्रिय मिष्ठान सुनामा।।

शिव गौरा सुत गणपति नंदन।
भक्त करें नित तव का वंदन।।
रिद्धि-सिद्धि के संग बिराजो।
कृपा सभी के शीश पे साजो।।

हाथ जोड़ आसन बैठाओ।
पीत वस्त्र उनको पहनाओ।।
पान सुपारी भोग लगाओ।
फिर अपनी फरियाद सुनाओ।।

जन-मन के हो तुम उद्धारक।
रोग दोष के तुम्हीं निवारक।।
प्रथम पूज्य तुम देव कहाते।
सफल पाठ पूजन हो जाते।।

शुभ अरु लाभ पुत्र द्वय प्यारे।
हृदय बसत हैं सब संसारे।
भक्त आपको सदा पुकारें।
प्रभो दरस दो आकर द्वारे।।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921