कविता

कविता

अगर नहीं हनक तुममें, सरकार नहीं चल सकती,
बदले की आग न हो तो, तकरार नहीं चल सकती।
क्षमादान का हक उसको, जो सक्षम ताकतवर हो,
कमजोर किसी को माफी दे, बात नहीं चल सकती।

चिड़िया सी औकात है जिसकी, दाना चुगने आया,
दिये निवाले दया भाव से, खाकर मन भरमाया।
आंख दिखाने लगा सोचकर, उसको यह अधिकार,
मानवता भी कमजोरी, चिड़िया ने हमको समझाया।

कब तक धमकी और निंदाओं से काम चलेगा,
कब तक हमदर्दी और दबावों से देश चलेगा?
समय आ गया औकात बता दो, इन दुष्टों को,
आतातायी को मौत, स्वाभिमान से मुल्क चलेगा।

— अ कीर्तिवर्द्धन