मुक्तक/दोहा

मुक्तक

प्यार का करघा, सुख-दुःख ताना-बाना,
जीवन चदरिया, भेद किसी ने ना जाना।
ताने और बाने पर, दौरे बहस जारी है,
जिंदगी का मकसद, किसी ने ना जाना।

— डॉ अ कीर्तिवर्धन